आयकर (ज्ञान श्रृंखला-3):गृह संपत्ति से अर्जित आय



  • 1. क्या उप किरायेदारी से प्राप्त किराये की आय पर “गृह संपत्ति से आय” मद में कर लगाया जा सकता है? ​

  • “गृह संपत्ति से आय” मद में कर संपत्ति मालिक के हाथों में किराये की आय पर लगाया जाता है, मालिक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को प्राप्त किराये की आय पर कर “गृह संपत्ति से आय” मद में नहीं लगायी जा सकती। इसलिए, एक किरायेदार द्वारा उप किरायेदारी से प्राप्त किराये की आय पर कर “गृह संपत्ति से आय” मद में नहीं लगाया जा सकता। ऐसी आय पर मामले के अनुसार “अन्य स्रोतों से आय” या व्यापार या पेशे से लाभ या आय मद में कर लगाया जा सकता है।

  • 2. एक दुकान से प्राप्त किराये की आय पर किस मद के तहत कर लगाया जा सकता है?

  • एक संपत्ति जो कोर्इ इमारत या उससे लगी हुयी भूमि हो और करदाता जिसका मालिक हो, से प्राप्त किराये की आय पर “गृह संपत्ति से आय” मद में कर लगाया जा सकता है। “गृह संपत्ति से आय” मद में कर लगाने के लिए संपत्ति का कोर्इ इमारत या उससे लगी हुयी भूमि होना चाहिए। क्योंकि दुकान एक भवन है इस लिए दुकान से प्राप्त किराये की आय पर “गृह संपत्ति से आय” मद में कर लगाया जायेगा।

  • 3. क्या किराये से आय उस व्यक्ति के हाथों कर हेतु वसूलनीय होगी जो संपत्ति का पंजीकृत मालिक नहीं हैं ?​​

  • ​​संपत्ति से किराए की आय संपत्ति के मालिक के हाथों ‘गृह संपत्ति से आय’ शीर्षक के तहत कर हेतु वसूलनीय होती हैं यदि किराया प्राप्त करने वाला व्यक्ति संपत्ति का मालिक नही हैं तो किराये की आय “गृह संपत्ति से आय” शीर्षक के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय नही होती (उदाहरण उप-भाडे़ द्वारा किरायेदार से प्राप्त किराया)। निम्नलिखित मामलों में एक व्यक्ति संपत्ति का पंजीकृत मालिक नही हो सकता लेकिन उसे सपंत्ति का मालिक (अर्थात् मालिक समझा जाना) के तौर पर समझा जाएगा तथा संपत्ति से किराए की आय उसके हाथों कर हेतु वसूलनीय होगी

    (1) यदि व्यक्ति बिना उचित विचार के अपने जीवनसाथी (अलग रहने के समझौते के संबंध में स्थानांतरण के तौर पर) अथवा अपने नाबालिग बालक (विवाहित पुत्री के तौर पर नहीं) अपना अथवा अपनी संपत्ति का स्थानांतरण करता हैं तो स्थानांतरण सपंत्ति के मालिक के तौर पर समझा जाएगा
    (2) अविभाज्य सपंत्ति धारक संपत्ति में सन्नहित संपत्ति के मालिक के तौर पर समझा जाता हैं
    (3) सहकारी-संस्था, कंपनी के सदस्य अथवा व्यक्तियों के अन्य संघ जिसके लिए एक भवन (अथवा उसका भाग) सोसाइटी, कंपनी अथवा संघ, जो भी स्थिति हो, की भवन निर्माण योजना के अंतर्गत आवंटित अथवा पट्टे पर दी जाती हैं, संपत्ति के मालिक के तौर पर समझी जाती हैं
    (4) संपत्ति अधिनियम के स्थानांतरण की धारा 53क की शर्तों को पूरा करके संपत्ति का धारण करने वाले व्यक्ति मालिक (यद्यपि वह पंजीकृत मालिक नही हो सकता) के तौर पर समझा जाएगा
    (क) समझौता लिखित में होना चाहिए
    (ख) क्रय प्रतिफल का भुगतान किया हो अथवा खरीददार भुगतान करने का इच्छुक हैं
    (ग) खरीददार समझौते के अनुसार संपत्ति का अधिग्रहण किया हो
    (5) 12 वर्षों से अधिक की अवधि के लिए संपत्ति के पट्टेदारी की स्थिति में (चाहे मूल रूप से निश्चित हो अथवा विस्तारण के लिए प्रावधान मौजूद हो), पट्टेदारी सपंत्ति के मालिक के तौर पर समझी जाएगी। हालांकि महीने दर महीने से पट्टेदारी के रूप में अथवा कम से कम एक वर्ष वर्ष की अवधि के लिए किसी अधिकार के रूप में इस प्रावधान के अंतर्गत नहीं आते


  • 4. किराये या माल की बिक्री से अर्जित, शीर्ष अधिकार के तहत व्यापार से संबंधित आय गृह संपत्ति से आय “‘माना जाता है?

  • ​एक संपत्ति से प्राप्त किराये की आय पर “गृह संपत्ति से आय” मद में कर संपत्ति के मालिक के हाथों में गृह संपत्ति से प्राप्त किराये की आय पर लगाया जाता है। यदि किराया प्राप्त करने वाला व्यक्ति संपत्ति का मालिक नहीं है, तो प्राप्त किराये की आय पर “गृह संपत्ति से आय” मद में कर नहीं लगाया जा सकता (जैसे किरायेदार द्वारा उप किरायेदारी से प्राप्त किराया). निम्नलिखित मामलों में एक व्यक्ति, यद्यपि संपत्ति का पंजीकृत मालिक नहीं भी हो सकता है लेकिन वह मालिक के रूप में माना जाएगा (अर्थात, मालिक की तरह समझा जायेगा) और संपत्ति से उसके हाथ में प्राप्त किराये की आय पर कर लगाया जायेगा:
    (1) एक व्यक्ति अपनी संपत्ति का अपने पति या पत्नी को हस्तांतरण करता है (एक दूसरे से अलग रहने के समझौते के रूप में हस्तांतरण नहीं) या यह हस्तांतरण अपने नाबालिग बच्चों (अविवाहित पुत्रियों) को बिना किसी पर्याप्त प्रतिफल के करता है तो अंतरणकर्ता व्यक्ति संपत्ति के मालिक के रूप में माना जाएगा।
    (2) अविभाजित जायदाद का धारक जायदाद में शामिल संपत्ति के मालिक के रूप में समझा जाता है।
    (3) सहकारी समिति, कंपनी या व्यक्तियों के अन्य संघों के एक सदस्य को, जिसके अधीन एक इमारत (या इसका एक भाग) समिति, कंपनी या संघ, जैसा भी मामला हो के गृह निर्माण योजना के तहत आवंटित या किराए पर दी गयी है, संपत्ति के समझा मालिक के रूप में व्यवहार किया जाता है।
    (4) एक व्यक्ति जो संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम के धारा 53क की शर्तों को पूरा करता हो संपत्ति के मालिक के रूप में समझा जायेगा (जबकि वह संपत्ति का पंजीकृत मालिक नहीं भी हो सकता है)। उक्त अधिनियम के धारा 53क​ निम्नलिखित शर्तों का प्रावधान करता है:
    (क) एक लिखित समझौता मौजूद होना चाहिए।
    (ख) खरीद मूल्य का भुगतान किया गया है या खरीददार यह भुगतान करने को तैयार हो।
    (ग) खरीदार ने समझौते का पालन करते हुए संपत्ति को अपने अधिकार में ले लिया हो।
    (5) एक संपत्ति के 12 साल से अधिक की एक अवधि के पट्टे के मामले में (मूल रूप से तय हो या विस्तार के लिए प्रावधान मौजूद हों), पट्टेदार संपत्ति का मालिक माना जाता है। हालांकि, मासिक पट्टे या एक वर्ष से कम अवधि के पट्टों के जरिये प्राप्त किसी भी अधिकार के प्रावधान इस में शामिल नहीं हैं।

  • 5.समग्र किराया क्या है? जब समग्र किराया इमारत को अन्य परिसंपत्तियों के साथ किराये पर देने से संबंधित हो​

  • ​समग्र किराए में भवन का किराया और अन्य परिसंपत्तियों या सुविधाओं के किराए भी शामिल होते हैं। समग्र किराए का कर उपचार निम्नानुसार है: –
    (क) एक ऐसे मामले में, जहां इमारत को किराये पर देना और अन्य संपत्ति को किराये पर देना अलग नहीं किया जा सकता (यानी दोनों किरायेदारियां एक दूसरे से जुडी हुयी हैं और अलग नहीं की जा सकती जैसे सुसज्जित थिएटर का भाड़ा), पूरे किराये (यानी समग्र किराया) पर मामले के अनुसार “व्यवसाय और पेशे का लाभ और मुनाफा” या “अन्य स्रोतों से आय” मद के तहत कर वसूल किया जायेगा। “गृह संपत्ति से आय” मद के तहत कोर्इ कर नहीं लिया जायेगा।
    (ख) एक मामले जहां, इमारत को किराये पर देना और अन्य संपत्ति को किराये पर देना अलग अलग किया जा सकता हो (अर्थात, दोनों किरायेदारियां एक दूसरे से अलग हैं, जैसे आवासीय बंगले के साथ फ्रिज भी भाड़े पर देना), में इमारत के किराये पर “गृह संपत्ति से आय” मद के तहत, और अन्य परिसंपत्तियों से प्राप्त किराये पर मामले के अनुसार “व्यवसाय और पेशे का लाभ और मुनाफा” या “अन्य स्रोतों से आय” मद के तहत कर वसूल किया जायेगा। यह नियम तब भी लागू होता है जब भले ही मालिक दोनों किरायेदारियों के लिए समग्र किराया प्राप्त करता है। दूसरे शब्दों में, ऐसे एक मामले में, समग्र किराये को इमारत के किराये और अन्य परिसंपत्तियों के किराये में आवंटित किया जाता है।

  • 6. जब समग्र किराया इमारत को सेवाओं के शुल्क के साथ किराये पर देने से संबंधित हो तो समग्र किराए का कर उपचार क्या है?​

  • ऐसे एक मामले में, जब समग्र किराये में, इमारत के किराये के साथ विभिन्न सेवाओं के शुल्क (जैसे लिफ्ट, चौकीदार, पानी की आपूर्ति आदि), इस स्थिति में, समग्र किराये का बटवारा कर दिया जाता है और संपत्ति के उपयोग के किराये की राशि पर “गृह संपत्ति से आय” मद के तहत, और विभिन्न सेवाओं के प्रभार पर मामले के अनुसार “व्यवसाय और पेशे का लाभ और मुनाफा” या “अन्य स्रोतों से आय” (जो भी स्थिति हो) मद के तहत कर वसूल किया जायेगा।

  • 7. पूरे साल किराये पर रहने वाली एक संपत्ति से आय की गणना कैसे करते हैं?

  • ​किराये पर दी गयी संपत्ति से “गृह संपत्ति से आय” मद के तहत, देय कर की गणना करने के मामले में आय की निम्नलिखित तरीके से गणना की जाती है:
    विवरण राशि
    सकल वार्षिक मूल्य XXXX
    घटायें – वर्ष के दौरान नगर करों का भुगतान XXXX
    शुद्ध वार्षिक मूल्य (एनएवी) XXXX
    घटायें – धारा 24 के तहत कटौती
    ➢ धारा 24 (क) के तहत एनएवी के 30% पर कटौती (XXXX)
    ➢ धारा 24 (ख)​ के तहत उधार पूंजी पर ब्याज के खाते में कटौती (XXXX)
    गृह संपत्ति से आय XXXX

  • 8. पूरे साल भर किराये पर दी गयी एक संपत्ति के सकल वार्षिक मूल्य की गणना कैसे की जाती है?

  • पूरे साल भर किराये पर दी गयी एक संपत्ति का सकल वार्षिक मूल्य निम्नलिखित तरीके से निर्धारित किया जाता है:
    चरण 1: संपत्ति के उचित संभावित किराये की गणना करें। (विवरण के लिए उचित संभावित किराये की गणना पर पूछे जाने वाले प्रश्न का संदर्भ लें)।
    चरण 2: संपत्ति के वास्तविक किराये की गणना करें। (विवरण के लिए वास्तविक किराए की गणना पर पूछे जाने वाले प्रश्न का संदर्भ लें)।
    चरण 3: सकल वार्षिक मूल्य की गणना करें। (सकल वार्षिक मूल्य चरण 1 या चरण 2 पर गणना की गयी राशि से अधिक होगा)।

  • 9. पूरे साल भर किराये पर दी गयी एक संपत्ति के सकल वार्षिक मूल्य की गणना करते समय उचित संभावित किराये की गणना कैसे की जाती है? ​

  • उचित संभावित किराया निम्नलिखित से अधिक होता है:
     ➢  संपत्ति का नगर मूल्य (नोट 1); या
     ➢  संपत्ति का उचित किराया (नोट 2)।
    यदि एक संपत्ति किराया नियंत्रण कानून के तहत आती है, तो उचित संभावित किराया मानक किराए से अधिक नहीं हो सकता (नोट 3)।
    नोट 1: नगर मूल्य का अर्थ
    नगर निगम के करों के संग्रह के लिए, स्थानीय अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र में सभी भवनों का आवधिक सर्वेक्षण करते हैं। एक संपत्ति के संबंध में, नगर निगम के अधिकारियों द्वारा निर्धारित इस तरह का मूल्य संपत्ति का नगर मूल्य कहा जाता है।
    नोट 2:  उचित किराये का अर्थ
    यह वह उचित संभावित किराया है जो संपत्ति को प्राप्त हो सकता है। यह उसी या इसी तरह के इलाके में स्थित एक समान संपत्ति के प्राप्त किराए के आधार पर निर्धारित किया जा सकता है।
    नोट 3:  मानक किराये का अर्थ
    यह वह अधिकतम किराया है जो एक व्यक्ति कानूनी रूप से किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत अपने किरायेदार से प्राप्त कर सकता है। मानक किराया केवल किराया नियंत्रण कानून के तहत शामिल संपत्तियों के मामले में लागू होता है।
    उदाहरण
    निम्नलिखित जानकारी से प्रत्येक संपत्ति के उचित संभावित किराये की गणना करें:
    विवरण संपत्ति क (रु.) संपत्ति ख (रु.) संपत्ति ग (रु.)
    नगर मूल्य 8,48,484 8,48,484 8,48,484
    उचित किराया 2,52,252 2,52,252 2,52,252
    मानक किराया लागू नहीं 84252 9,84,000
    **
    उचित संभावित किराया निम्न में से अधिक होगा:
     ➢  संपत्ति का नगर मूल्य; या
     ➢  संपत्ति का उचित किराया।
    किराया नियंत्रण कानून के तहत शामिल एक संपत्ति के मामले में, उचित संभावित किराया संपत्ति का मानक किराये के अधीन नगर मूल्य या उचित किराये से अधिक होगा। प्रत्येक संपत्ति के मामले में इसकी गणना इस प्रकार की जायगी:
    संपत्ति क (रु.) संपत्ति ख (रु.) संपत्ति ग (रु.)
    उचित संभावित किराया 8,48,484 रुपए हो जाएगा। (नगर मूल्य और उचित किराये से अधिक है)। उचित संभावित किराया 84,252 रुपए हो जाएगा। (नगर मूल्य और उचित किराये से अधिक लेकिन मानक किराये तक प्रतिबंधित है)। उचित संभावित किराया 8,48,484 रुपए हो जाएगा जो नगर मूल्य और उचित किराये से अधिक लेकिन मानक किराये तक प्रतिबंधित है। (मानक किराया अधिक है और इसलिए मानक किराया का प्रतिबंध इस मामले में लागू नहीं होगा)।

     

  • 10.एक संपत्ति जो वर्ष भर किराये पर दी गयी हो के सकल वार्षिक मूल्य की गणना करते समय वास्तविक किराए की गणना कैसे की जाती है? ​

  • वास्तविक किराया का मतलब है वह किराया जिसके लिए संपत्ति वर्ष के दौरान किराए पर दी गयी है। वास्तविक किराए की गणना करते समय, रिक्ति अवधि से संबंधित किराए की कटौती नहीं की जाती है। हालांकि, अगर इस संबंध में निर्दिष्ट शर्तें पूरी हो रही हैं तो अप्राप्त किराए (*) की वास्तविक किराए से कटौती की जाती है।
    (*) अप्राप्त किराया संपत्ति का वह किराया होता है जो संपत्ति का मालिक किरायेदार से वसूल नहीं कर सकता यानी, किरायेदार द्वारा भुगतान नहीं किया गया किराया। अगर निम्नलिखित शर्तें पूरी हो रही हैं तो वर्ष के वास्तविक किराये में से अप्राप्त किराये की कटौती की जाती है;
     ➢  किरायेदारी यथार्थ है।
     ➢  दोषी किरायेदार, संपत्ति खाली गया है या उसे संपत्ति खाली करने के लिए मजबूर करने का कदम उठा लिया गया है।
     ➢  दोषी किरायेदार के कब्जे में करदाता की कोर्इ अन्य संपत्ति नहीं है।
     ➢  करदाता ने इस तरह की राशि की वसूली के लिए कानूनी कार्यवाही सहित सभी कदम उठाए हैं, या उसने आकलन अधिकारी को संतुष्ट कर दिया है कि कानूनी कार्यवाही बेकार होगी।
    उदाहरण
    श्री राज एक बंगले का मालिक है। वर्ष 2015-16 के दौरान बंगले को श्री कुमार को 84,000 रुपये मासिक किराए पर दिया गया है। आंतरिक विवाद के कारण, श्री कुमार ने मार्च 2016 के महीने के किराए का भुगतान नहीं किया था। संपत्ति के सकल वार्षिक मूल्य की गणना के लिए इस्तेमाल की जाने वाली वास्तविक किराए की राशि क्या होगी?
    **
    2016 के मार्च महीने का किराया प्राप्त नहीं किया गया है और, इसलिए, अप्राप्त किराया 84,000 रुपए होगा।
    संपत्ति के सकल वार्षिक मूल्य की गणना करते समय, वास्तविक किराये में से 84,000 रुपए अप्राप्त किराये की कटौती की जाएगी। इस प्रकार, सकल वार्षिक मूल्य की गणना करते समय वास्तविक किराया 9,24,000 रुपए (10,08,000 रुपये – 84,000 रुपये अप्राप्त किराया) माना जाएगा। अगर इस संबंध में चर्चा की गयी सभी शर्तें पूरी की गयी हैं तो 84,000 रुपये अप्राप्त किराया वास्तविक किराये में से काट लिया जाएगा।
    अगर इस संबंध में निर्दिष्ट की गयी सभी शर्तें पूरी नहीं की गयी हैं तो सकल वार्षिक मूल्य की गणना करते समय वास्तविक किराया 10,08,000 रुपये लिया जाएगा। (यानी, 84,000 रुपये का अप्राप्त किराया घटाये बिना पूरे साल का किराया)।

  • 11. पूरे साल भर किराये पर दी गयी एक संपत्ति के सकल वार्षिक मूल्य की गणना कैसे की जाती है? ​

  • पूरे साल भर किराये पर दी गयी एक संपत्ति का सकल वार्षिक मूल्य को निर्धारित करने के तरीके की चर्चा पहले की जा चुकी है, इसलिए, इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए यहाँ हम एक उदाहरण की चर्चा करेंगे।
    उदाहरण
    श्री राजा द्वारा प्रदान उसके द्वारा किराए पर दी गयी 3 संपत्तियों के संबंध में निम्नलिखित जानकारी से सभी संपत्तियों के सकल वार्षिक मूल्य की गणना करें।
    विवरण संपत्ति क (रुपये) संपत्ति ख (रुपये) संपत्ति ग (रुपये)
    नगर मूल्य 8,48,484 8,48,484 2,52,252
    उचित किराया 2,52,252 2,52,252 8,48,484
    मानक किराया लागू नहीं 84,252 9,84,000
    पूरे वर्ष का वास्तविक किराया 9,60,000 60,000 9,60,000
    अप्राप्त किराया (*) 1,60,000 शून्य 80,000
    (*) अप्राप्त किराये की कटौती के लिए निर्दिष्ट सभी शर्तें पूरी हैं।
    **
    सकल वार्षिक मूल्य की गणना निम्नानुसार की जाएगी:
    चरण 1: संपत्ति के उचित संभावित किराये की गणना।
    चरण 2: संपत्ति के वास्तविक किराये की गणना।
    चरण 3: सकल वार्षिक मूल्य की गणना।
    इन चरणों के आधार पर गणना निम्नानुसार की जाएगी:
    विवरण संपत्ति क (रुपये) संपत्ति ख (रुपये) संपत्ति ग (रुपये)
    चरण 1 पर राशि (नोट 1) 8,48,484 84,252 8,48,484
    चरण 2 पर राशि (नोट 2) 8,00,000 60,000 8,80,000
    चरण 3 में राशि, यानी, सकल वार्षिक मूल्य (नोट 3) 8,48,484 84,252 8,80,000
    नोट 1: चरण 1 पर राशि (अर्थात उचित संभावित किराया) नगर मूल्य या उचित किराये से अधिक है (मानक किराए के अधीन)।
    नोट 2: चरण 2 पर राशि अप्राप्त किराए को घटाने के बाद प्राप्त वास्तविक किराए की राशि है। अर्थात संपत्ति क के मामले में 8,00,000 रुपये (9,60,000 रुपये – 1,60,000 रुपये), संपत्ति ख के मामले में 60,000 रुपये, और संपत्ति ग के मामले में 8,80,000 रुपये (9,60,000 रुपये – 80,000 रुपये)।
    नोट 3: सकल वार्षिक मूल्य चरण 1 या चरण 2 की राशि से अधिक होगा।

  • 12.किराये पर दी गयी एक ऐसी संपत्ति के मामले में जो पूरे साल भर के दौरान कुछ समय तक खाली रही हो, के सकल वार्षिक मूल्य की गणना कैसे की जाती है? 

  • जहां संपत्ति या संपत्ति का कोर्इ भी भाग किराये पर दिया जाता है और पिछले पूरे वर्ष के दौरान या उसके किसी भी भाग के दौरान खाली था और ऐसी रिक्ति के कारण मालिक द्वारा प्राप्त या प्राप्य तत्संबंधी वास्तविक किराया उस संपत्ति के उचित संभावित किराये से कम है, इसलि​ए प्राप्त या प्राप्य (खाली समय के कम किराये के रूप में) संपत्ति के सकल वार्षिक मूल्य से कम होने का विचार किया जाएगा।
  • 13. किराये पर दी गयी संपत्ति के मामले में “गृह संपत्ति से आय” मद में कर के दायरे में आने वाली आय की गणना करते समय सकल वार्षिक मूल्य से खर्च की कटौती क्या होगी?

  • ​​किराये पर दी गयी संपत्ति के मामले में “गृह संपत्ति से आय” मद में कर के दायरे में आने वाली आय की गणना करते समय केवल निम्न मदों को ही सकल वार्षिक मूल्य से कटौती के रूप में दावा किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में, निम्नलिखित खर्चों के आलावा करदाता द्वारा किए गए अन्य किसी भी खर्च की कटौती का दावा नहीं किया जा सकता है:
     ➢  वर्ष (*) के दौरान करदाता द्वारा भुगतान किये गए नगर निगम करों के खाते में कटौती।
     ➢  धारा 24 (क) के तहत शुद्ध वार्षिक मूल्य के 30% की दर से कटौती।
     ➢  धारा 24 (ख)​ के तहत संपत्ति की खरीद, निर्माण, मरम्मत, नवीनीकरण या पुनर्निर्माण के प्रयोजन के लिए उधार ली गर्इ पूंजी पर ब्याज के खाते में कटौती।
    (*) वर्ष के दौरान केवल स्वामी द्वारा भुगतान किये गए नगर निगम करों की कटौती की जा सकती है, इसलिए, नगर निगम के कर जो देय हैं पर जिनका वर्ष के दौरान भुगतान नहीं किया गया है या जिनका वहन किरायेदार द्वारा किया जा रहा हो की कटौती नहीं की जा सकती है।

  • 14. गृह संपत्ति से आय की गणना करते समय दोस्तों और रिश्तेदारों से लिये गए ऋण पर ब्याज के भुगतान की कटौती का दावा किया जा सकता है?

  • हाँ, अगर ऋण घर के खरीद, निर्माण, मरम्मत, नवीनीकरण या पुनर्निर्माण के लिए लिया जाता है। अगर ऋण व्यक्तिगत या अन्य प्रयोजनों के लिए लिया जाता है तो फिर इस तरह के ऋण पर ब्याज की कटौती का दावा नहीं किया जा सकता है।

  • 15. किराये पर दी गयी संपत्ति के मामले में “गृह संपत्ति से आय” मद के तहत कर के दायरे में आने वाली आय की गणना करते समय आवास ऋण पर कितने ब्याज की कटौती का दावा किया जा सकता है?

  • ​किराये पर दी गयी संपत्ति के मामले में “गृह संपत्ति से आय” मद के तहत कर के दायरे में आने वाली आय की गणना करते समय करदाता संपत्ति के खरीद, निर्माण, मरम्मत, नवीनीकरण या पुनर्निर्माण के उद्देश्य से लिए गए ऋण पर ब्याज के खाते में धारा 24 (ख) के तहत कटौती का दावा कर सकते हैं।
    किराये पर दी गयी संपत्ति के मामले में धारा 24 (ख)​ के तहत कटौती का दावा करने के लिए ब्याज की मात्रा की कोर्इ सीमा नहीं है। हालांकि, एक स्वयं के कब्जे में होने वाली संपत्ति के मामले में, मामले के अनुसार सीमा 2,00,000 रुपये या 30,000 रुपये हो सकती है (बाद में पूछे जाने वाले प्रश्न में इस पर चर्चा की जायेगी)।

  • 16. पूर्व निर्माण अवधि क्या है?

  • ​किराये पर दी गयी संपत्ति के मामले में “गृह संपत्ति से आय” मद के तहत कर के दायरे में आने वाली आय की गणना करते समय करदाता संपत्ति के खरीद, निर्माण, मरम्मत, नवीनीकरण या पुनर्निर्माण के उद्देश्य से लिए गए ऋण पर ब्याज के खाते में धारा 24 (ख) के तहत कटौती का दावा कर सकते हैं।
    ब्याज के खाते में कटौती को दो रूपों में वर्गीकृत किया जाता है, अर्थात, पूर्व निर्माण अवधि से संबंधित ब्याज और निर्माण के बाद की अवधि से संबंधित ब्याज।
    निर्माण के बाद की अवधि से संबंधित ब्याज प्रासंगिक वर्ष (यानी, जिस वर्ष के लिए आय गणना की जा रही है) से संबंधित ब्याज है।
    पूर्व निर्माण अवधि वह अवधि है जो ऋण के उधार लेने के तिथि से शुरू और निम्न में से पहले पर समाप्त होता है:
     ➢  ऋण की अदायगी की तिथि; या
     ➢  संपत्ति के निर्माण / अधिग्रहण के पूरा होने की तारीख से तुरंत पहले पड़ने वाले 31 मार्च
    पूर्व निर्माण अवधि से संबंधित ब्याज की उस वर्ष से शुरू हो कर जिस वर्ष में गृह संपत्ति का अधिग्रहण या निर्माण किया है पांच समान वार्षिक किश्तों में कटौती की अनुमति दी गयी है। इस प्रकार, ब्याज के खाते में धारा 24 (बी)​ के तहत करदाता के लिए उपलब्ध कुल कटौती, पूर्व निर्माण अवधि (यदि हो तो) से संबंधित ब्याज का 1/5 वां भाग निर्माण अवधि के बाद (यदि हो तो) से संबंधित ब्याज होगा।

  • 17. ​मै और मेरा जीवनसाथी संयुक्त रूप से एक घर के मालिक हैं जिसमें हम दोनों ने स्वतंत्र स्रोतों से समान राशि का निवेश किया है। क्या किराए से प्राप्त आय को हम दोनों के बीच विभाजित किया जा सकता है और व्यक्तिगत रूप से कर लगाया जा सकता है?

  • ​​​हाँ, यदि प्रत्येक सह स्वामी की हिस्सेदारी निश्चयात्मक है।​

  • 18. स्व-अधिकृत संपत्ति क्या है?

  • एक स्व-अधिकृत संपत्ति का मतलब एक ऐसी संपत्ति से है जो पूरे वर्ष करदाता द्वारा अपने निवास के लिए उसके कब्जे में हो। (अगले अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न को भी देखें)।
  • 19. स्व-अधिकृत संपत्ति से आय की गणना कैसे की जाती है?

  • ​​एक स्व-अधिकृत संपत्ति का मतलब एक ऐसी संपत्ति है जो करदाता द्वारा अपने निवास के लिए पूरे वर्ष भर अपने कब्जे में रखा गया हो। एक स्व-अधिकृत संपत्ति के मामले में “गृह संपत्ति से आय” मद के तहत कर देय आय की गणना का तरीका निम्नलिखित है:
    विवरण राशि
    सकल वार्षिक मूल्य शून्य
    वर्ष के दौरान भुगतान किये गए नगर करों को घटायें शून्य
    शुद्ध वार्षिक मूल्य (एनएवी) शून्य
    धारा 24 के तहत कटौती घटायें
    धारा 24 (क) के तहत कटौती एनएवी का 30% की दर से शून्य
    धारा 24 (ख)​ के तहत कटौती उधार पूंजी पर ब्याज के खाते में (XXXX)
    गृह संपत्ति से आय XXXX
    ऊपर की गणना में यह देखा जा सकता है कि एक स्व-अधिकृत संपत्ति के मामले में “गृह संपत्ति से आय” या तो शून्य (अगर आवास ऋण पर कोर्इ ब्याज नहीं है) या आवास ऋण पर ब्याज की हद तक नकारात्मक (यानी, हानि) हो जाती है। एक स्व-अधिकृत संपत्ति के मामले में आवास ऋण पर ब्याज के संबंध में कटौती 2,00,000 रुपये या 30,000 रुपये जैसा भी मामला हो, से अधिक नहीं हो सकता है। (इस पर बाद में चर्चा की जायेगी)

  • 20.क्या एक संपत्ति जिसका करदाता अपने निवास के लिए उपयोग नहीं की जा रही है को एक स्व-अधिकृत संपत्ति के रूप में व्यवहार किया जा सकता है?

  • ​​​​एक स्व-अधिकृत संपत्ति का मतलब एक ऐसी संपत्ति से है जो पूरे वर्ष करदाता द्वारा अपने निवास के लिए उसके कब्जे में हो। इस प्रकार, जिस संपत्ति का मालिक अपने निवास के लिए अपने कब्जे में नहीं रखता उस संपत्ति को स्व-अधिकृत संपत्ति के रूप में नहीं माना जा सकता है। हालांकि, इस नियम का एक अपवाद भी है। अगर निम्नलिखित शर्तें पूरी हो रही हों तो फिर संपत्ति को स्व-अधिकृत माना जायेगा और संपत्ति का वार्षिक मूल्य “शून्य” हो जाएगा, भले ही संपत्ति मालिक के अपने निवास के लिए वर्ष भर उसके कब्जे में नहीं रहा हो:
     (क)  करदाता एक संपत्ति का मालिक है;
     (ख)  ऐसी संपत्ति पर वास्तव में उसके द्वारा कब्जा अपने रोजगार, व्यापार या पेशे जो किसी अन्य जगह पर चल रहा हो के कारण नहीं किया जा सकता और वह उस अन्य स्थान पर रहते हों जिसके वे मालिक नहीं है।
     (ग)  ऊपर (क) में वर्णित संपत्ति (या उसका कोर्इ भाग) वर्ष के दौरान किसी भी समय किराये पर नहीं दी गयी हो।
     (घ)​  ऐसी संपत्ति से कोर्इ अन्य लाभ न प्राप्त हो रहा हो।

  • 21. “गृह संपत्ति से आय” मद में किस आय पर कर लगाया जा सकता है? ​

  • ​एक संपत्ति जो कोर्इ इमारत या उससे लगी हुयी भूमि हो और करदाता जिसका मालिक हो, से प्राप्त किराये की आय पर “गृह संपत्ति से आय” मद में कर लगाया जा सकता है।

  • 22. अगर एक व्यक्ति अपने निवास के लिए एक से अधिक संपत्ति को अधिकृत करता है तो कर निहितार्थ क्या होगा? क्या वह सभी संपत्तियों को स्व-अधिकृत संपत्ति (एसओपी) के रूप में ले सकते हैं और सकल वार्षिक मूल्य (जीएवी) को शून्य मान सकते हैं?

  • एसओपी लाभ (यानी, संपत्ति को एसओपी के रूप में मानना और जीएवी को शून्य के रूप में दावा करना) अपने निवास के लिए उपयोग किये गए मालिक के कब्जे में स्थित केवल एक संपत्ति के संबंध में ही उपलब्ध है।
    अगर एक व्यक्ति अपने निवास के लिए एक से अधिक संपत्ति का उपयोग करता है, तो एसओपी लाभ उसके द्वारा चयनित एक संपत्ति के संबंध में ही प्रदान किया जाएगा और अन्य संपत्ति/संपत्तियों को “किराये पर दिया गया माना जाएगा”। किराये पर दी गयी मानी जा रही संपत्ति के संबंध में किराये पर “दी गयी” संपत्ति के संबंध में पहले की गयी चर्चा के अनुसार ही आय की गणना की जायेगी।

  • 23. मैं दो घरों का मालिक हूँ। पहला एक फार्म हाउस है जहाँ मैं सप्ताहांत पर जाता हूँ और दूसरा शहर में है जिसका मैं काम करने के दिनों में पूरे हफ्ते उपयोग करता हूँ। क्या इन दोनों घरों को स्व-अधिकृत संपत्ति के रूप में मानना सही है?​

  • नहीं, आयकर कानून के उद्देश्य के लिए आप स्व-अधिकृत संपत्ति के रूप में केवल एक ही संपत्ति पर दावा कर सकते हैं और अन्य संपत्ति को किराये पर दी गयी संपत्ति के रूप में माना जायेगा।
  • 24. मैं दो घरों का मालिक हूँ, दोनों घर मेरे और मेरे परिवार के कब्जे में हैं, क्या इसमें कोर्इ भी कर उलझाव उत्पन्न होता है?

  • हां. जैसा कि इसके पहले सवाल के जवाब में कहा गया है कि, गृह संपत्ति से आय केवल एक आवासीय इकार्इ के संबंध में एक काल्पनिक आय है और यदि यह स्व-अधिकृत है तो इस आय को शून्य माना जायेगा। अन्य आवासीय इकार्इ के मामले में, एक उचित किराये को आपकी आय के रूप में मानना होगा और तदनुसार कर लगाया जाएगा।

  • 25. एक स्व-अधिकृत संपत्ति के मामले में, आवास ऋण पर कितने व्याज की कटौती का दावा किया जा सकता है?

  • ​आवास ऋण पर ब्याज के खाते में धारा 24 (ख) के तहत कटौती से संबंधित प्रावधान स्व-अधिकृत संपत्ति के मामले में भी किराए पर दी गयी संपत्ति के मामले की तरह ही लागू होता है। दूसरे शब्दों में, धारा 24 (ख) के तहत करदाता के लिए उपलब्ध कुल कटौती, स्व अधिकृत संपत्ति के मामले में पूर्व निर्माण अवधि (यदि हो तो) से संबंधित ब्याज का 1/5 वां भाग निर्माण अवधि के बाद (यदि हो तो) से संबंधित ब्याज होगा धारा 24 (ख) के प्रावधानों पर पहले ही एक अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न में चर्चा की जा चुकी है।
    हालांकि, स्व-अधिकृत संपत्ति के मामले में धारा 24 (ख)​ के तहत कटौती 2,00,000 रुपये या 30,000 रुपये (जैसा भी मामला हो) से अधिक नहीं हो सकता है। अगर निम्न सभी स्थितियाँ, पूरी हो रही हैं तो उधार पूंजी पर ब्याज के संबंध में सीमा 2,00,000 रुपये होगी:
     ➢  पूंजी 01/04/1999 को या उसके के बाद उधार ली गयी है।
     ➢  पूंजी अधिग्रहण या निर्माण के उद्देश्य के लिए उधार लिया है (अर्थात, मरम्मत, नवीकरण, पुनर्निर्माण के लिए नहीं)।
     ➢  पूंजी जिस वित्तीय वर्ष में उधार ली गयी थी उसके अंत से 3 साल के भीतर अधिग्रहण या निर्माण पूरा हो गया है।
     ➢  जो व्यक्ति ऋण का विस्तार करता है वह प्रमाणित करता है कि संपत्ति के अधिग्रहण या निर्माण के लिए लिये गए पहले के एक ऋण के बकाये के तहत मूल राशि के फिर से वित्त के रूप में या घर के अधिग्रहण या निर्माण के लिए अग्रिम प्राप्त राशि के संबंध में इस तरह का ब्याज देय है।
    अगर ऊपर की शर्तों में से कोर्इ शर्त पूरी नहीं होती तो 2,00,000 रुपये की सीमा 30,000 रुपये तक कम हो जाएगी।

  • 26. एक ऐसी संपत्ति से आय की गणना कैसे की जायेगी जो वर्ष के एक भाग में स्व-अधिकृत हो और वर्ष के दूसरे भाग में किराये पर दी गयी हो?

  • कभी कभी एक संपत्ति वर्ष के दौरान कुछ समय तक किराये पर दी हुयी हो सकती है और शेष अवधि में स्व-अधिकृत हो सकती है। (यानी, किराये पर दी जाने के साथ ही वर्ष के दौरान स्व-अधिकृत हो सकती है)। मद “गृह संपत्ति से आय” के तहत, कर के दायरे में आने वाली आय की गणना के प्रयोजन के लिए ऐसी संपत्ति पूरे वर्ष भर किराये पर दी जाने के रूप में मानी जायेगी और आय की इसी रूप में गणना की जाएगी।
    हालांकि, ऐसी संपत्ति के मामले में, कर योग्य आय की गणना करते समय किराये पर दी गयी अवधि के लिए वास्तविक किराए पर ही विचार किया जाएगा।

  • 27. एक ऐसी संपत्ति से आय की गणना कैसे की जाती है जिसका एक हिस्सा किराये पर दिया गया हो और दूसरा हिस्सा स्व-अधिकृत हो?

  • एक मकान दो या दो से अधिक स्वतंत्र इकाइयों से मिलकर कर बना हो सकता है जिनमें से एक स्व-कब्जे में हो और शेष किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा रहा हो (अर्थात- किराये पर दिये जाने या स्वयं के व्यवसाय के लिए इस्तेमाल)। ऐसी संपत्ति से होने वाली आय की निम्नलिखित तरीके से गणना की जाएगी:
    क) भाग / यूनिट जो साल भर अपने निवास के लिए करदाता अपने कब्जे में रखता है एक स्वतंत्र संपत्ति के रूप में माना जाएगा और इस तरह के एक भाग/इकार्इ से आय एक स्व-कब्जे में संपत्ति के मामले में की गयी चर्चा के तरीके से गणना की जाएगी।
    ख) भाग / यूनिट जो किराये पर दी गयी है को एक स्वतंत्र संपत्ति के रूप में माना जाएगा और इस तरह के एक भाग/यूनिट से किराये पर दी गयी संपत्ति के मामले में की गयी चर्चा के तरीके से आय की गणना की जाएगी।

  • 28. अप्राप्त किराए का जो बाद में प्राप्त हो जाता है का कर उपचार क्या है? ​

  • अप्राप्त किराए की बाद में कोर्इ भी वसूली जिस वर्ष में प्राप्त होता है उस वर्ष के लिए “गृह संपत्ति से आय” मद के तहत करदाता की आय होना माना जाएगा। (करदाता चाहे उस वर्ष में उस संपत्ति का मालिक हो या नहीं)।

  • 29. मेरे पास किराए पर दी गयी 5 अलग अलग संपत्तियां हैं। क्या मुझे हर संपत्ति के लिए अलग से गृह संपत्ति आय की गणना करनी चाहिए या सभी प्राप्तियों को एक ही गणना में शामिल कर लिया जाना चाहिए?​

  • ​हर संपत्ति के लिए अलग से गृह संपत्ति से आय की गणना करनी चाहिए।

  • 30. बकाया किराए की राशि का कर उपचार क्या है?

  • ​किराए की बकाया राशि के कारण प्राप्त हुयी राशि (जिसपर पहले कर नहीं वसूला गया है) 30% के बराबर राशि घटाने के बाद ऐसी बकाया राशि पर कर वसूल किया जाएगा। इस राशि पर कर उस वर्ष के लिए वसूला जायेगा जिस वर्ष में यह प्राप्त की जाती है। अगर इस तरह के बकाया के प्राप्त होने के वर्ष में करदाता संपत्ति का मालिक है या नहीं है तब भी यह शुल्क वसूल किया जाता है।

Published by Business So Simple

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One thought on “आयकर (ज्ञान श्रृंखला-3):गृह संपत्ति से अर्जित आय

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