पर्यावरण दिवस के सम्मान में….☘☘☘☘

अनिमेष अमिताभ सिद्धार्थ
तथागत गौतम बुद्ध की
तपोभूमि बुद्धत्व प्रदायिनी
विश्व-विमोहिनी नगरी बोधगया…
बहुआयामी बौद्ध आस्था का सर्वोच्च शिखर…
मुमुक्षा तितिक्षा चिर प्रतीक्षा का पाथेय सम्हाले…
बौद्ध भिक्षुओं का चिर अभीप्सित
बोधिसत्व का अन्वेषक
बोधीवृक्ष का संरक्षक
बोधीवृक्ष से समृद्ध महिमामंडित….
लिप्सा की लपटों से स़ंतप्त हो उठे
काल के भाल पर सुशोभित …
मध्यम मार्गदर्शन के मर्म-मंथन में निरत…
समशीतोष्ण शरतचंद्र की
शीतल किरणों से जगमग …
आत्म प्रकाश का पियूष-पयोनिधी…
भारतभूमि की गरिमा का ध्वज…
भारतभूषण बोधगया….
आम्रमंजरियों से सुवासित
आम्रपाली के प्रिय आम्रवन के
अमल अर्पण का साक्षी बोधगया….
भोगी मानस मे विकसित
वैराग्य की योग-शिखा
कि
अनिकेत बुद्धदेव के अपरिग्रही जीवनदर्शन का प्रचंड प्रवाह….
कि
अनिमेष की पतित पावनी मर्मज्ञ दृष्टि से
छलक उठी
दिव्य करुणा की
तरंग….
रुप गर्विता नगरवधू का
बौद्ध भिक्षुणी बन कर रहने की उमंग….
संचय का त्याग मे
भोग भावों का
योगमय जीवन की चाह मे
अप्रत्याशित भव्य रुपांतरण…..
कामनाओं के प्रज्जवलित सघन वन में
निष्काम करुणा के
शांति जल का अभिसिंचन…
हे मोक्षभूमि हे बोधगया
अतीत के आकाश मे तुम्हारे
बिखरे हुए कौंधते हुए
ना जाने कितने कितने इन्दधनुषी रंग….
भीड़भरे वाहन-कोलाहल मे खोये खोये …
क्रय विक्रय मे मशगूल जनप्रवाह से साराबोर..
सारे के सारे
पथ हैं तुम्हारे…
और जनसंकुल से आकुल व्याकुल सभी पथों के दोनो किनारे..
दीर्घकाय और दीर्घायु प्राण वायु के परम प्रवाहक …
औषधीय आगार विविध वृक्षों की संरक्षित कतार….
धूप ताप सहते
सतत कोलाहल का गरल पीते….
धूलधूसरित भाग्य रेखा का कुचक्र निरखते हुए..
वर्षा ऋतु की बाट जोहते हुए…
शीतल छांव भरी बयार का उपहार …
पथिक वृन्द पर उड़ेलते हुए …
मर्माहत मौन मे डूबे हुए..
ना जाने कितनी जातक कथाओं का
संस्कृति के कितने कितने
लुभावने और डरावने
वृत्तांत का
बखूबी बखान हैं कर रहे…
जड़ों का सफर अंधकार की गहराई तै करता हुआ…….
अंधकूपों मे तिरोहित जीवन जल का
अनुसंधान करता हुआ
अदम्य जीजिविषा इन वृक्षों की
धरा को धन्य करती हुई …
परहित निरत जीवनवृत्त के आग्रही
ये वृक्ष महज वनस्पतियों के वंशज नहीं…
काल के गर्भ में समाहित
समग्र इतिवृत्तात्मक
दस्तावेजों के
अनमोल कोषागार हैं ये…
पर्यावरण के नहीं मात्र ये संशोधक…
धरा के धरातल पर प्रवाहित
समग्र जीवन चेतना के सौंदर्य और सजीवता के
संजवनी सम…
नैसर्गिक उपहार है ये. ..
बोधगया मे प्रस्फुटित
बुद्धत्व का
बोधीवृक्ष ही तो विश्व विख्यात आधार है…
वृक्षों का आभारी
हमसब और हमारा संसार है..

Prabha Kumari Gupta
B.Ed, M.A. Retired from Deputy Secretary, Sugarcane and Agriculture Department, Jharkhand.

Published by Business So Simple

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