DRAFT NOTARIES (AMENDMENT) BILL ISSUED FOR STAKEHOLDERS’ CONSULTATION (Press release 07 Dec 2021)

To give opportunity to young eligible legal practitioners aspiring to serve as Notary Public, the draft Bill proposes to restrict the renewal of certificates of practice of Notaries up to two terms.

नोटरी (संशोधन) विधेयक का मसौदा हितधारकों की सलाह के लिये जारी किया गया


नोटरी पब्लिक के रूप में काम करने के आकांक्षी युवा पात्र वकीलों को अवसर; विधेयक के मसौदे में नोटरियों के प्रमाणपत्र का नवीनीकरण दो कार्यकाल तक सीमित करने का प्रस्ताव

The Notaries Act, 1952 was enacted by the Parliament to regulate the profession of Notaries. The provisions of the Notaries Act, 1952 and Rules framed thereunder empower the Central Government as well as State Governments to appoint Notaries who possess the prescribed qualifications.

In terms of existing provisions of the Notaries Act, 1952 and Rules framed thereunder, the number of terms of renewal of certificates of practice of a Notary is unrestricted after the initial appointment. There are fixed number of Notaries who are appointed by the Central as well as State Governments as reflected in the Schedule to the Notaries Rules, 1956. Further, these Notaries are appointed in a particular area, keeping in view the commercial importance and requirement of Notaries in that particular area, to avoid flooding of Notaries.

It is felt that an opportunity needs to be given to young eligible legal practitioners who are aspiring to serve as Notary Public which may help them to build up their professional excellence by which they can provide legal services in a more effective manner.

In view of the above, it is proposed to restrict the overall term of Notaries for a period upto fifteen years (initial term of five years and two renewal terms of five years each) by curtailing renewals of unlimited terms, thus providing an opportunity for young legal professionals to serve as a Notary. The same would also lead to better development and regulation of notarial work undertaken by Notaries Public and facilitate needs of the profession.

In order to protect the interests of Notaries and to avoid any vacuum, it is proposed that those applications received for successive renewal of certificates of practice for third or more terms and whose validity expires prior to coming into force of the Notaries (Amendment) Act, 2021 will be considered for another term. Further, the certificates of practice of Notaries already renewed and issued prior to coming into force of the Notaries (Amendment) Act, 2021 shall be valid till expiry of such renewal term.

Under Section 10 of the Notaries Act, 1952, the appropriate Government is empowered to remove the name of a Notary Public from the Register of Notaries maintained by it, if a Notary has been found upon inquiry in the prescribed manner, to be guilty of such professional or other misconduct as in the opinion of the Government renders him unfit to practice as Notary. However, there is no provision in the Notaries Act for suspending the certificate of practice of Notary against whom a complaint has been received or otherwise till completion of inquiry initiated against him. Consequently, in some cases, despite complaint of


prima facie gross misconduct, the notary continues to practice during pendency of inquiry proceedings.

It is therefore proposed to add provisions in the Notaries Act, 1952 empowering the appropriate Government for suspension of certificate of practice of Notary Public against whom a complaint has been received or otherwise, for professional misconduct for such period as deemed appropriate for conduct of inquiry.

It is felt that with the advent of Digitization, the records of Notary Public be also digitized and preserved in digital form, as may be prescribed under the Rules, in order to prevent misconduct in respect of notarization and safeguard the interests of general public. This will help to avoid any fraud, deceit, tampering of records and back-dating of notarization, etc. For the aforesaid purpose, provisions have also been proposed for digitization and automation of notarial work undertaken by the Notaries.

In order to achieve the said objective, it is proposed to amend the Notaries Act, 1952 The main features of the proposed Bill may be briefly summarized as under:

  • The draft Bill proposes to restrict the renewal of certificates of practice of Notaries up to two terms, i.e., original term of five years and two renewal terms of five years each;
  • Power to suspend the certificate of practice in cases of professional misconduct by the appropriate government for conduct of inquiry;
  • Digitization of notarial work undertaken by Notaries.

As a part of pre-legislative consultation process, a copy of the aforesaid Draft Bill has been uploaded on the website of the Department of Legal Affairs ( https://legalaffairs.gov.in/ ) for comments/views, latest by 15.12.2021.

नोटरियों के पेशे को नियमबद्ध करने के लिये संसद में नोटरी अधिनियम, 1952 को कानून का दर्जा दिया गया था। नोटरी अधिनियम, 1952 के प्रावधानों और नियमों के तहत केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों को यह अधिकार है कि वे निर्धारित योग्यता रखने वाले व्यक्तियों को नोटरी के रूप में नियुक्त कर सकती हैं।

नोटरी अधिनियम, 1952 और नियमों के मौजूदा प्रावधानों के तहत, नोटरियों के काम करने के प्रमाणपत्र के नवीनीकरण की कोई बाध्यता नहीं थी। एक बार नोटरी नियुक्त हो जाने के बाद उनका नवीनीकरण असीमित बार किया जा सकता था। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त नोटरियों की संख्या तय होती है, जैसा कि नोटरी नियमावली, 1956 की अनुसूची में दिया गया है। इसके अलावा, इन नोटरियों को एक खास क्षेत्र में नियुक्त किया जाता है, जिसके तहत यह ध्यान में रखा जाता है कि उस विशेष स्थान पर नोटरियों की क्या व्यापारिक आवश्यकता और जरूरत है। ऐसा इसलिये किया जाता है, ताकि नोटरियों की भरमार न हो जाये।

ऐसा महसूस किया जा रहा था कि उन युवा वकीलों को भी यह अवसर दिया जाना चाहिये, जो नोटरी पब्लिक बनना चाहते हैं, ताकि उन्हें अपनी पेशेवराना कुशलता बढ़ाने में मदद मिले और वे ज्यादा कारगर तरीके से कानूनी सहायता दे सकें।

उपरोक्त को ध्यान में रखते हुये, यह प्रस्ताव किया गया है कि नोटरियों का कुल कार्यकाल पंद्रह वर्ष तक सीमित कर दिया जाये। पहली नियुक्ति पांच वर्षों के लिये और नवीनीकारण पांच-पांच वर्षों के लिये दो बार किया जाये। इस तरह असीमित नवीनीकरण को खत्म करने का प्रस्ताव किया गया है, ताकि युवा वकीलों को नोटरी के रूप में काम करने का मौका मिल सके। इस प्रस्ताव के जरिये नोटरी पब्लिक का काम करने वाले वकीलों का बेहतर विकास होगा और काम नियबद्ध तरीके से होगा। इसके जरिये वकालत के पेशे की जरूरतें भी पूरी होंगी।

नोटरियों के हितों की रक्षा करने और नोटरियों कीकिसी भी प्रकार कीकमी से बचने के लिये, प्रस्ताव किया गया है कि तीसरे या उससे अधिक कार्यकाल के प्रमाणपत्र के नवीनीकारण के जो आवेदन मिले हों तथा जिनकी वैधानिकता नोटरी (संशोधन) अधिनियम, 2021 के लागू होने के पहले समाप्त हो रही हो, उन आवेदनों पर विचार किया जायेगा। इसके अलावा, नोटरी (संशोधन) अधिनियम, 2021 के लागू होने के पहले जिन नोटरियों के प्रमाणपत्रों का नवीनीकरण होकर उन्हें जारी किया जा चुका है, वे भी उस नवीनीकरण के समाप्त होने की तारीख तक वैध माने जायेंगे।

नोटरी अधिनियम, 1952 की धारा 10 के तहत सक्षमसरकार को यह अधिकार है कि वह नोटरी रजिस्टर से नोटरी पब्लिक का नाम हटा सकती है। यह कदम उस समय उठाया जा सकता है, जब नोटरी के ऊपर निर्धारित मानकों के तहत जांच चल रही हो, उसे अपने पेशे के साथ कदाचार का दोषी पाया गया हो या सरकार की दृष्टि में वह गलत आचरण का दोषी हो। इन मामलों में सरकार अगर उसे नोटरी के रूप में काम करने के अयोग्य मान लेगी, तो उसे हटाया जा सकता है। बहरहाल, नोटरी अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत उस नोटरी का प्रमाणपत्र निलंबित किया जा सके, जिसके खिलाफ शिकायत मिली हो या जांच अधूरी हो। परिणामस्वरूप, कुछ मामलों में, प्रथम दृष्टया कदाचार का मामला बनने पर भी, नोटरी जांच चलने के दौरान अपने काम पर बना रहता है।

इसलिये नोटरी अधिनियम, 1952 में यह प्रावधान करने का प्रस्ताव है, जिसके तहत सक्षम सरकार उस नोटरी पब्लिक का प्रमाणपत्र निलंबित कर सकती है, जिसके खिलाफ कदाचार की शिकायत मिली हो। सरकार जांच चलने की अवधि तक कार्रवाई कर सकती है।

यह जरूरत भी महसूस की गई कि डिजिटलीकरण की शुरुआत हो जाने पर नोटरी पब्लिक के दस्तावेजों का भी डिजिटलीकरण किया जाये और उन्हें डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जाये, जैसा कि नियमों में दिया गया हो। इसका मकसद यही है कि नोटरी कार्रवाई के दौरान कदाचार को रोका जा सके और आम जनता के हितों की रक्षा हो सके। उपरोक्त उद्देश्य के लिये, नोटरियों के कार्यों के डिजिटलीकरण का प्रस्ताव किया गया है।

उपरोक्त लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये, नोटरी अधिनियम, 1952 के संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। प्रस्तावित विधेयक की मुख्य विशेषतायें संक्षेप में इस प्रकार हैं:-

  • विधेयक के मसौदे में नोटरी के कामकाज सम्बंधी प्रमाणपत्रों के नवीनीकरण को सीमित करने का प्रस्ताव है, यानी पांच वर्ष की मूल नियुक्ति के बाद पांच-पांच वर्ष के दो नवीनीकरण होंगे।
  • काम करने का प्रमाणपत्र निलंबित करने का प्रस्ताव, बशर्ते कि कदाचार का मामला बनता हो। यह जांच सक्षम सरकार करेगी।
  • नोटरियों के कामकाज का डिजिटलीकरण।

विधायी-पूर्व परामर्श प्रक्रिया के सिलसिले में उपरोक्त विधेयक के मसौदे की प्रति को विधि कार्य विभाग की वेबसाइट ( https://legalaffairs.gov.in/ ) पर अपलोड किया गया है। इस पर टिप्पणियां/विचार 15 दिसंबर, 2021 तक दिये जा सकते हैं।

Author: Business So Simple

Hi, I am business consultant working with a team of Chartered Accountants, Company Secretaries, Lawyers & MBAs. I am promoter of " Make Your Business So Simple" "Make Education So Simple" Make Life So Simple" Make Legal Affairs So Simple".

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