आयकर (ज्ञान श्रृंखला-4): प्रकल्पित कराधान योजना(Presumptive taxation scheme)
· प्रकल्पित कराधान योजना के मायने क्या हैं?
आयकर अधिनियम के अनुसार, कारोबार में व्यस्त व्यक्ति को नियमित लेख – जोखा की किताबें बनाये रखना आवश्यक है, और हिसाब – किताब का लेख–परिक्षण कराना भी आवश्यक है। छोटे करदाताओं को इस उकतानेवाले काम से राहत दिलाने के लिए, आयकर कानून ने धाराओं 44एडी और 44एर्इ के तहत, प्रकल्पित कराधान योजना तैयार की है।
प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार करनेवाला व्यक्ति अपनी आय की घोषणा निर्धारित दर पर कर सकता है, जिसके बदले उसे हिसाब किताब की किताबें बनाये रखने की आवश्यकता नहीं होगी, और न ही उसे हिसाब किताब के रजिस्टर को परीक्षण करने की आवश्यकता है।
लघु करदाताओं के लिए, आयकर कानून ने निम्नलिखित रूप से दो प्रकल्पित कराधीन योजनाएं तैयार की हैं:
1. धारा 44 एडी की प्रकल्पित कराधान योजना;
2. धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना;
· 44 एडी की प्रकल्पित कराधान योजना किसके लिए रूपांकित की गर्इ है ?
धारा 44 एडी की प्रकल्पित कराधान योजना किसी भी व्यवसाय से जुड़े ( 44 एर्इ में उल्लिखित माल वाहनों को भाड़े पर देना वगैरह के व्यवसाय को छोड़कर) लघु करदाताओं की राहत के लिए रूपांकित की गर्इ है।)
· धारा 44 एडी की प्रकल्पित कराधान योजना का लाभ उठाने के लिए कौन योग्य है ?
धारा 44 एडी की प्रकल्पित कराधान योजना निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा अंगीकार की जा सकती है :
1. निवासी व्यक्ति;
2. निवासी अविभक्त परिवार;
3. निवासी साझेदारी कंपनी (सीमित उत्तरदायित्व साझेदारी कंपनी को छोड़कर);
दूसरे शब्दों में, यह योजना अनिवासी द्वारा या किसी और व्यक्ति, हिन्दू अविभक्त परिवार या साझेदारी कंपनी (सीमित उत्तरदायित्व साझेदारी कंपनी को छोड़कर) अंगीकार नहीं की जा सकती।
ये प्रावधान उस व्यक्ति द्वारा अंगीकार नहीं किये जा सकते, जिसने संबधित वर्ष में धारा 10ए/ 10एए/ 10बी/ 10बीए या धारा 80 एचएच से 80 आरआरबी तक के तहत छूट या राहत का दावा किया है।
· कौन से व्यवसाय प्रकल्पित कराधान योजना के योग्य नहीं हैं ?
44 एडी के तहत प्रकल्पित कराधान योजना, निम्नलिखित व्यवसाय को छोड़कर किसी भी व्यवसाय में व्यस्त लघु करदाताओं की राहत या छूट के लिए रूपांकित की गर्इ है :
• धारा 44 एर्इ के तहत माल वाहनों को किराये पर देने का व्यवसाय;
• वह व्यक्ति जो एजेंसी के व्यवसाय से जुड़ा है;
• वह व्यक्ति जो कमीशन या दलाली के रूप में आय अर्जित करता है;
ऊपर चर्चित व्यवसाय के अलावा, वह व्यक्ति जो 44 एए(1) में उल्लिखित व्यवसाय से जुड़ा है, वह प्रकल्पित कराधान योजना के तहत योग्य नहीं है।
· क्या धारा 44 एडी के तहत एक बीमा एजेंट प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार कर सकता है ?
एक व्यक्ति जो कमीशन या दलाली के रूप में आय अर्जित करता है, वह धारा 44 एडी के प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार नहीं कर सकता। बीमा एजंट कमीशन के द्वारा आय अर्जित करते हैं, इसलिए वे 44 एडी की प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार नहीं कर सकते।
· क्या धारा 44 एडी के तहत वह व्यक्ति प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार कर सकता है, जिसकी कुल बिक्री या सकल प्राप्तियां 1,00,00,000 रुपये है ?
44 एडी के तहत, प्रकल्पित कराधान योजना योग्य व्यक्तियों द्वारा अंगीकार की जा सकती है, अगर उसके व्यवसाय से उसकी कुल बिक्री या सकल प्राप्तियां 44 एबी में निर्धारित लेख–जोखा की सीमा को पार नहीं करता (यानी कि1,00,00,000 रुपये।) दूसरे शब्दों में, अगर व्यवसाय की कुल बिक्री या सकल प्राप्तियां 1,00,00,000 रुपये की राशि लांघ जाती है, तो वह व्यक्ति 44 एडी के तहत, प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार नहीं कर सकता।
· क्या धारा 44 एए(1) में निर्धारित व्यवसाय से जुड़ा व्यक्ति, धारा 44 एडी के तहत, प्रकल्पित कराधान योजना अंगीकार कर सकता है ?
धारा 44 एए(1) में निर्धारित किसी भी व्यवसाय से जुड़ा व्यक्ति, धारा 44 एडी के तहत प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार नहीं कर सकता।
· आयकर कानून के सामान्य प्रावधानों के तहत, कर – योग्य व्यावसायिक आय के परिकलन कैसे किया जाता है, यानी कि अगर †† ए डी की प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार नहीं करता ?
सामान्य रूप से, आयकर कानून के अनुसार, हर व्यक्ति की कर–योग्य व्यावसायिक आय, निम्नलिखित रूप से परिकलित की जाती है:
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विवरण
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राशि
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कुल बिक्री या व्यवसाय की सकल प्राप्तियां
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कम : आय अर्जित करने के लिए किया गया व्यय
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कुल व्यावसायिक कर योग्य आय
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——–
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ऊपर बताये गए तरीके से, कर – योग्य व्यवसायिक आय को परिकलित करने के उद्येश से, कर डाटा को लेख – जोखा की किताबें बनाये रखना आवश्यक है जिनमे दी गर्इ जानकारी के आधार पर, आय का परिकलन किया जायेगा।
· कर–योग्य व्यवसायिक आय का परिकलन कैसे किया जाता है, अगर एक व्यक्ति धारा 44 एडी के तहत प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार करना चाहता है?
अगर एक व्यक्ति 44 एडी के प्रावधान अंगीकार करना चाहता है, प्रकल्पित आधार पर आय परिकलित की जाती है, यानि कि/वर्ष के उपयुक्त व्यवसाय की कुल बिक्री या सकल प्राप्तियों का 8%
दूसरे शब्दों में, अगर एक व्यक्ति 44 एडी के प्रावधान अंगीकार करता है, तो आय का परिकलन एफ ए क्यू (यानी कि कुल बिक्री से व्यय घटाकर) में चर्चित सामान्य तरीके से नहीं किया जायेगा, पर कुल बिक्री के 8% की दर से किया जायेगा।
उच्च दर पर आय, यानी कि 8% से अधिक आय घोषित की जा सकती है अगर वास्तविक आय 8% से अधिक है।
· धारा 44 एडी की प्रकल्पित कराधान योजना के अनुसार, करदाता की आय कुल बिक्री या सकल प्राप्तियों की 8% की दर पर परिकलित जायेगी। और 8% की आय में से क्या करदाता और अधिक छूट का दावा कर सकता है ?
आयकर कानून के सामान्य प्रावधानों के अनुसार, कर – योग्य व्यवासिक आय, आयकर कानून अनुसार कटौती योग्य व्यय का निगमन करके, और उन कटौतियों को नामंज़ूर करने के बाद जो आयकर कानून के अनुसार कटौती योग्य नहीं हैं, उसके बाद आय परिकलित की जाएगी।
अगर एक व्यक्ति, धारा 44 एडी के तहत प्रकल्पित कराधान योजना को चुनता है, तो आयकर कानून के तहत प्रदान किये गए छूट/नामंजूरी के प्रावधान लागू नहीं होंगे, और 8% की प्रकल्पित दर पर परिकलित आय, प्रकल्पित कराधान योजना के तहत, व्यवसाय संबधी सुनिश्चित कर – योग्य आय मानी जाएगी। दूसरे शब्दों में, 8% की दर पर परिकलित आय, आवृत किये हुए कारोबार की सुनिश्चित अंतिम आय होगी, और कोर्इ और व्यय लविकार या अस्वीकार नहीं किया जायेगा।
फिर भी, अगर करदाता एक साझेदार कंपनी है जो प्रकल्पित कराधान योजना को चुनती है, कुल बिक्री की Š% की दर से परिकलित आय में से, मेहनताना और साझेदारों को चुकता किये गए ब्याज के रूप में आगे की छूट का दावा किया जा सकता है (आयकर कानून के अनुसार परिकलित।)
धारा 44 एडी के अनुसार आय की संगणना करते समय, अवमूल्यन के रूप में अलग से छूट उपलब्ध नहीं होगी। फिर भी, ऐसे व्यवसाय में प्रयोग की जानेवाली किसी भी संपत्ति का मूल्य, जैसे कि अवमूल्यन का धारा 32, के अनुसार दावा किया गया है, और वास्तव में उसकी मंज़ूरी दी गर्इ है।
· अगर एक व्यक्ति धारा 44 एडी के तहत प्रकल्पित कराधान योजना को चुनता है, तो धारा 44 एए के अनुसार लेख – जोखा की किताबें बनाये रखना आवश्यक है?
धारा 44 एए, व्यवसाय या पेशे से जुड़े व्यक्ति को लेख – जोखा की किताबें बनाये रखने के कार्य में व्यवहार करता है। इसलिए, व्यवसाय/पेशे से जुड़े एक व्यक्ति को धारा 44 एए के अनुसार लेख – जोखा की किताबें बनाये रखना आवश्यक है।
अगर एक व्यक्ति किसी व्यवसाय से जुड़ा है, और धारा 44 ऐडी की प्रकल्पित कराधान योजना चुनता है, तो धारा 44 एए के, लेखा – जोखा की किताबें बनाये रखने के प्रावधान उसपर लागू नहीं होंगे। दूसरे शब्दों में, अगर एक व्यक्ति धारा 44 ऐडी के प्रावधान चुनता है, और अपनी आय कुल बिक्री की 8% की दर से घोषित करता है, तो उसे धारा 44 एई की प्रकल्पित कराधान योजना के तहत आवृत किये गए कारोबार के संबध, धारा 44 ऐडी में दिए गए प्रावधानों के अनुसार उसे लेख – जोखा की किताबें बनाये रखने की आवश्यकता नहीं है। लेख – जोखा की किताबें बनाये रखने की राहत के अलावा, यह योजना कर दाता को लेख – जोखा की किताबें के परीक्षण से भी छुटकारा मिल जायेगा।
· अगर एक व्यक्ति धारा 44 एडी की प्रकल्पित कराधान योजना चुनता है, तो क्या उसे धारा 44 एडी के तहत आवृत किये गए व्यवसाय के संबध में अग्रिम कर चुकता करने की आवश्यकता होगी ?
धारा 44 एडी की प्रकल्पित कराधान योजना चुनने वाला व्यक्ति को, धारा 44 एडी के तहत आवृत किये गए व्यवसाय के संबध में अग्रिम कर भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी।
· अगर एक व्यक्ति 44 एडी की ओरकल्पित कराधान योजना नहीं चुनता है, और अपनी आय निचली दर पर घोषित करता है, तो ऐसे व्यक्ति पर किस प्रकार के प्रावधान लागू होंगे?
एक व्यक्ति अपनी आय निचली दर पर घोषित कर सकता है (8% से भी कम), फिर भी अगर वो ऐसा करता है और उसकी आय उस अधिकतम राशि को लांघ जाती है जो कर – योग्य नहीं है, तो उसे धारा ए ए के अनुसार, लेख – जोखा की किताबें बनाये रखनी होंगी और उनका परिक्षण भी करना होगा।
· धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना किसके लिए रूपांकित की गर्इ है ?
धारा 44 एर्इ की योजना उन लघु करदाताओं को राहत प्रदान करने के लिए है, जो करदाता माल ढोहने और माल – वाहनों को किराए पर देने के व्यवसाय जुड़े हैं।
· धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना का लाभ उठाने के योग्य कौन है ? और 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना का लाभ कौंस व्यवसाय उठा सकता है ?
धारा 44 एर्इ के प्रावधान हर व्यक्ति पर लागू होते हैं, (यानी कि व्यक्ति, हिन्दू अविभक्त परिवार, कंपनी वगैरह।)
धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना का लाभ उस व्यक्ति द्वारा उठाया जा सकता है जो माल वाहनों को किराये पर देने के व्यवसाय से जुड़ा है और जो वर्ष के किसी भी समय, घå माल वाहनों से अधिक का मालिक नहीं है।
· क्या वह व्यक्ति जिसके पास 10 से अधिक माल वाहन हैं, धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार कर सकता है ?
धारा 44 ऐर्इ की कराधान योजना उस व्यक्ति द्वारा अंगीकार की जा सकती है, जो माल दोहने और माल वाहनों को भाड़े पर देने के है, और जिसके पास, वर्ष के किसी भी समय 10 से अधिक माल वाहन नहीं हैं।
इस योजना की महत्व की बात है कि पास, वर्ष के किसी भी समय, 10 से अधिक माल वाहनों के मालिक होने पर प्रतिबंध। इसीलिए अगर एक व्यक्ति, वर्ष के किसी भी समय पर 10 से अधिक माल वाहनों का मालिक होता है, तो वह इस योजना का लाभ नहीं उठा सकता।
· अगर एक व्यक्ति धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार करता है, तो उसकी कर – योग्य व्यवसायिक आय के परिकलन का क्या तरीका होगा?
अगर एक व्यक्ति धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार करना चाहता है, तो उसकी आय का परिकलन अनुमानित आधार पर होगा। आय के परिकलन की दर भारी माल वाहनों और अन्य वाहनों के लिए अलग अलग होगी। दरें इस प्रकार हैं :
• भारी माल वाहनों में, (*) आय का परिकलन 5,000 रुपये प्रति माह या उसके भाग की दर से होगा, जिस अवधि में, वर्ष के किसी भी समय माल वाहनों का मालिकाना करदाता के हाथों होगा ।
(*) भारी माल वाहन के मायने हैं बिना किसी माल के, कोर्इ भी माल वाहन, ट्रेक्टर, रोड रोलर जिसका वज़न 12,000 किलोग्राम से अधिक है।
• किसी भी अन्य माल वाहन के मामले में, (यानी कि भारी माल वाहन के अलावा) आय का परिकलन 4,5000 रुपये प्रति माह या उसके हिस्से के लिए होगा, वर्ष की किसी भी अवधि में माल वाहन का मालिकाना करदाता के हाथ में होगा।
नोट : अगर वास्तविक आय अधिक है, तो प्रकल्पित दर, यानी क़ि 5,000 रुपये/4,500 रुपये , से अधिक है तो अधिक आय घोषित करनी होगी।
नोट : एक माह का भाग पूरे माह के रूप में माना जायेगा।
बेहतर समझ के लिए स्पष्टीकरण
श्री खुश माल ढोहने और माल वाहनों को भाड़े पर देने के कारोबार से जुड़े हैं। वर्ष2013-14 में उनके पास 9 माल वाहन थे, (5 भारी माल वाहन और 4 अन्य माल वाहन।) अगर वो धारा 44 एर्इ के प्रावधान अंगीकार करता है, तो माल ढोहने और माल वाहनों को भाड़े पर देने से अर्जित की हुर्इ उसकी कर योग्य आय क्या होगी ?
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धारा 44 एर्इ के अनुसार, भारी माल वाहनों के मामले में, आय का परिकलन 5,000 रुपये की दर प्रति माह या उसके भाग के लिए किया जायेगा, वर्ष की जिस अवधि में माल वाहनों का मालिकाना करदाता के हाथ में होगा । अन्य माल वाहनों के मामले में (भारी माल वाहनों अलावा) आय का परिकलन 4,500 रुपये प्रतिमाह या उसके भाग की दर से होगा, वर्ष की जिस अवधि के दौरान माल वाहनों (भारी माल वाहन छोड़कर) का मालिकाना कर दाता के हाथ में होगा ।
मौजूदा हालात में, पूरे वर्ष में श्री खुश के पास 5 भारी माल वाहन और 4 अन्य माल वाहन थे, (भारी माल वाहनों के अलावा।) इसलिए उनकी आय का परिकलन निम्नलिखित रूप से किया जायेगा :
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विवरण
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रुपये
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भारी माल वाहनों से अर्जित आय
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प्रति भारी माल वाहन से प्रति माह अर्जित की गर्इ आय
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5,000
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भारी माल वाहनों की संख्या (×)
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5
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धारा 44 एर्इ के अनुसार 5 माल वाहनों से अर्जित आय
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25,000
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वर्ष में उन महीनों की संख्या जिनमे माल वाहनों पर मालिकाना अधिकार था (×)
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12
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धारा 44 एर्इ के प्रावधानों के अनुसार 5 भारी वाहनों से अर्जित कुल आय (अ)
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3,00,000
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अन्य माल वाहनों से अर्जित आय (भारी माल वाहनों केा छोड़कर)
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प्रति माह प्रति वाहन से अर्जित आय (भारी माल वाहनों छोड़कर)
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4,500
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वाहनों की संख्या (×)
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4
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धारा 44 एर्इ के प्रावधानों के अनुसार 4 अन्य वाहनों (भारी माल वाहन छोड़कर) से अर्जित मासिक आय
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18,000
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वर्ष में उन महीनों की संख्या जिनमे माल वाहनों पर मालिकाना अधिकार था (×)
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12
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धारा 44 एर्इ के प्रावधानों के अनुसार 4 अन्य वाहनों से अर्जित कुल आय (भारी माल वाहनों को छोड़कर) (ब)
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2,16,000
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धारा 44 एर्इ के प्रावधानों के अनुसार माल ढोहने, और माल वाहनों को भाड़े पर देने से अर्जित आय (अ+ब)
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5,16,000
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· धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना के अनुसार, एक करदाता की आय रुपये 4,500/रुपये 5,000 प्रति माह प्रति माल वाहन की दर से परिकलित की जायेगी, तो क्या ऐसे मामले में एक करदाता निर्धारित दर पर घोषित प्रकल्पित आय पर, और अधिक निगमन का दावा कर सकता है ?
आयकर कानून के सामन्य प्रावधानों के तहत, कर–योग्य व्यावसायिक आय, व्यय के रूप में निगमन के बाद परिकलित की जायेगी, जो निगमन आयकर कानून के अनुसार कटौती योग्य हैं और उन व्ययों को अस्वीकार करने के बाद जो कटौती – योग्य नहीं हैं।
अगर एक व्यक्ति धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना को चुनता है, तो आयकर कानून के अनुसार उसपर, स्वीकृति/अस्वीकृति के प्रावधान लागू नहीं होंगे, और आय का परिकलन प्रकल्पित दर के हिसाब से रुपये 4,500/रुपये 5,000 प्रति माह प्रति वाहन होगा, जो कि अंतिम (फ़ाइनल) आय मानी जायेगी। दूसरे शब्दों में, प्रति माह प्रति वाहन की आय रुपये 4,500/रुपये 5,000 की दर से, कारोबार की फ़ाइनल कर–योग्य आय मानी जायेगी और किसी भी प्रकार के अन्य व्यय अनुमत नहीं होंगे।
तो भी, अगर कर दाता साझेदार कंपनी है, और वह प्रकल्पित कराधान योजना को चुनती है, आय का परिकलन रुपये 4,500/रुपये 5,000 प्रति माह प्रति माल वाहन की दर पर परिकलित किया जायेगा और आगे के निगमन का दावा मेहनताना और साझेदारों को दिए गए ब्याज के रूप में किया जा सकता है।
धारा 44 एर्इ के प्रावधानों के अनुसार, आय का परिकलन करते समय, अवमूल्यन के तौर पर अलग से निगमन अनुमत नहीं है, फिर भी किसी भी संपत्ति का लिखित मूल्य धारा 32 के तहत अवमूल्यन का दावा किया गया है और वास्तव में अनुमत भी किया गया है।
· अगर एक व्यक्ति धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना अंगीकार करता है, तो उसे धारा 44 एर्इ के तहत लेख – जोखा की किताबें बनाये रखना ज़रूरी हैं ?
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 44 एए में व्यवसाय/कारोबार से जुड़े व्यक्ति को लेख – जोखा की किताबें बनाये रखने के संबध में काफी प्रावधान मौजूद हैं। इसलिए व्यवसाय/कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति को धारा 44 एए के अनुसार लेख – जोखा की किताबें बनाये रखना आवश्यक है।
अगर एक व्यक्ति धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना को चुनता है, तो उसे धारा 44 एए से संबधित लेख – जोखा की किताबें बनाये रखने के प्रावधान लागू नहीं होंगे। दूसरे शब्दों में, अगर एक व्यक्ति धारा 44 एर्इ के प्रावधान अंगीकार करता है, और अपनी आय रुपये 4,500/रुपये 5,000 प्रति वाहन प्रति माह के हिसाब से घोषित करता है, तो उसे धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना के तहत आवृत व्यवसाय के संबध में, धारा 44 एए के तहत लेखा–जोखा की किताबें बनाये रखने की आवश्यकता नहीं है। लेखा–जोखा की किताबें बनाये रखने की राहत पाने के अलावा, यह योजना करदाता को लेखा–जोखा की किताबों के अनिवार्य परीक्षण से भी छुटकारा दिलाएगा।
· अगर एक व्यक्ति धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार करता है, तो क्या उसे धारा 44 एर्इ के तहत, आवृत व्यवसाय की आय के संबध में अग्रिम कर भुगतान करने की आवश्यकता होगी?
जो भी व्यक्ति धारा 44 एर्इ के तहत, प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार करता है, उसे अग्रिम कर के भुगतान के लिए कोर्इ राहत नहीं है। इसलिए वो अग्रिम कर भुगतान करने के लिए ज़िम्मेदार है, इसके बावजूद कि उसने धारा 44 एर्इ के तहत प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार किया है।
· अगर कोर्इ व्यक्ति धारा 44 एर्इ की प्रकल्पित कराधान योजना को अंगीकार नहीं करता, और अपनी आय निचली दर पर घोषित करता है, तो उसपर कौनसे प्रावधान लागू होंगे?
एक व्यक्ति अपनी आय निचली दर पर घोषित कर सकता है, (यानी कि रुपये 4,500/रुपये 5,000 प्रति वाहन, प्रति माह।). लेकिन वो अगर ऐसा करता है तो उसे धारा 44 एए के अनुसार, लेख–जोखा की किताबें बनाये रखनी होंगी, और अपनी लेख – जोखा की किताबों का परिक्षण भी कराना होगा।
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